Thursday, 25 February 2010

तीन


मैंने तीर बनाए तीन ,
दो की नोक ही नहीं ,
एक तो चलता ही नहीं .

जो चलता ही नहीं ,
उससे शेर मरे तीन ,
दो तो मरे ही नहीं ,
एक तो भग ही गया .

जो भग ही गया ,
वो नदी में गया तीन ,
दो तो सोखी हुई,
 एक में पानी ही नहीं .

जिसमें पानी ही नहीं ,
उसमें मटके थे तीन ,
दो तो फूटे ही गए ,
एक का पेंदा ही नहीं .

जिसका पेंदा ही नहीं ,
उसमें चावल पकाए तीन .
दो तो कच्चे ही रहे ,
एक तो पका ही नहीं .

जो पका ही नहीं ,
उसे सादू ने खाया, तीन,
दो तो भोके ही रहे,
 एक ने खाया ही नहीं .

जिसने खाया ही नहीं ,
उसको सिक्के मिले तीन ,
दो तो खोटे ही रहे ,
एक तो चलता है .

धन्यवाद !!!!!!

Saturday, 6 February 2010

अपने बाघों को बचाओ



आपको पता होगा कि यह मैने टीवी से लिया होगा लेकिन मैं इसलिए भी लिखा रहा हूँ क्युंकी आपको उस बाघ के छोटे से बच्चे  को देखकर दया नहीं आती और अगर आपको नहीं आती तो आपको पत्थर दिल नाम से ज्यादा कुछ और नहीं कह सकते. हमें अपने राष्ट्रीय जानवर को मरते देख कर के कुछ अफ़सोस नहीं होता, शर्म नहीं आती, यह तो लोगों को तो गाली देने जैसा है  .कई लोग ऐसे हैं जो तो उस विज्ञापन को देखकर यही सोचते हैं की ये हमको ब्लॉग लिखने पर मजबूर करें और जब ब्लॉग लिखें तो बिजली के बिल के पैसे और बढे जिससे उनके पास पैसे आयें. सरकार राष्ट्रीय पक्षी के लिए एक नियम रखा है " जो भी मोर को मारेगा उसे जेल भेज देंगे."
लेकिन यह नियम बाघ अपने राष्ट्रीय जानवर पर लागू है जिससे यह बच सकें और बंदी न बने चिड़ियाघर में . दया तो आती हैं नहीं किसी को हैना, अभी समय है ब्लॉग लिखो,पढो और आगे दूसरों को पढाओ और अपने 1411 बघ बचाओ क्युंकी मैं छोटा हूँ मेरा ब्लॉग कोई-कोई पढ़ता है लेकिन जो पढ़े वो दूसरों को पढ़ना पलीज.!!!!!!!!!!!!!!!
और धोनी अंकल और भूटिया अंकल मैंने तो आप के कहने पर बाघ बचाने के लिए ब्लॉग लिखा है...
क्या अब हमारे देश में बाघ बच जाएंगे?????...................शायद बच जाएं!
आपका ध्रुव 

Thursday, 4 February 2010

मुझे आज क्या बुरा लगा



स्कूल जाना-हमेशा ही बुरा लगता है.मन करता है ममा को कहूं ना!ना!ना! और सोता रहूँ...सुबह उठकर ब्रश कर के ठन्डे पानी से हाथ धोना मुझे बहुत बुरा लगता है.फिर भी मैं रोज स्कूल जाता हूँ क्योंकि--ममा डांटेंगे,स्कूल में मेरे दोस्तों से मिलने के लिए और क्लास की सीटों पर कूदने के लिए जब मेम क्लास में ना हो...भगवान प्लीज ये बात मेरी मेम को न पता लगने देना...दोस्तों को खुश करने के लिए , दोस्तों को नाटक से खुश करने के लिए और उनको हंसाने के लिए और सबसे जरुरी बात पढ़ने के लिए ...आगे जीवन में बड़े होकर मैं कुछ भी बनूँगा उसके लिए मेरा बहुत अच्छे से पढना जरूरी है..हम जानते हैं की सबको सपने आते हैं जिसमें हमें सिर्फ सोने का मन करता है . अगर हमने इस शैतान मन को वश में नहीं किया तो मेरा,आपका और सबका भविष्य ख़राब होगा ...खैर मुझे स्कूल जाना आज भी बुरा लगा.

स्कूल पहुँच कर जब बस रुकी तो सब बच्चे नीचे उतरने लगे...तभी कार्तिक गांधी जिसको हम प्यार से बापू कहते है लाइन तोड़ कर बीच में घुस गया...मुझे गुस्सा आया तो मैंने उसे धक्का दे दिया...पर वह लाइन में गुसते हुए उतर गया...उसका लाइन तोडना मुझे बहुत बुरा लगा. 
फिर हम सब भागकर गेट की तरफ भागे हम असेम्बली तक पहुँचते कि राष्ट्र गान शुरू हो गया..हम गेट पर ही सावधान होकर खड़े हो गए..जन गन मन ..पर सावधान होकर खड़ा होना मुझे बहुत अच्छा लगता है.
जन गन मन के साथ असेम्बली खत्म हो गयी ...मुझे बहुत अच्छा लगा हम सब भागकर अपनी क्लास में पहुँच गए.
फिर बुरा दिन शुरू होगया.
सबसे पहले मेथ्स की मेम ने अपने पीरियड में टेबल्स लर्न करवाई..जिनको लर्न करते करते मैं पक गया हूँ.
फिर एस एस टी के पीरियड में मेम ने रीड कर अपने आप लर्न करने को कहा जिसमे कभी भी मजा नहीं आता है...मैं बोर हो जाता हूँ..मैंने कुछ भी नहीं पढ़ा क्योंकि मेम को यह कभी पता नहीं लगता है की खुली बुक से मैं रीड कर रहा हूँ या नहीं.
गेम्स के पीरियड में फ्रेंच सिखाने का पीरियड हुआ जिसमे मुझे बहुत मजा आया ...
फ्रेंच में मुझे पांच एसेंट सिखाए...
एक्यूट एसेंट,ग्रेव एसेंट,सरकोंफ्लेक्स एसेंट,त्रेमा एसेंट और सिदिले एसेंट ...
हिंदी के पीरियड में गेम्स खेलने गए और हमेशा की तरह से पी टी सर से डांट खाकर आ गये...जो मुझे बुरा लगा.
स्कूल की छुट्टी के बाद बस में छोटे बच्चों का ध्यान रखने के लिए मुझे,कार्तिक और मनीष को बस का मोनिटर बना दिया..इस पर कृतिका को इतनी चिढ लगी कि वो मिझे ऐसे घूर कर देखने लगी जैसी मुझे कच्चा खा जायेगी..मुझे बहुत हंसी आ रही थी पर मैं नहीं हंसा क्योंकि अगर मैं ऐसा करता तो वह मेरे बाल नोच लेती..
फिर बस से उतर कर में धर आ गया..!

Tuesday, 2 February 2010

कोयल


देखो कोयल काली है 
पर मीठी है उसकी बोली .
इसने ही तो कुक -कुक कर 
आमों में मिसरी घोली .

कोयल ! कोयल ! सच बतलाओ 
क्या संदेशा लाई हो ?
बहुत दिनों के बाद आज 
फिर इस डाली पर आई हो .

क्या गति हो,किसे बुलाती,
बतला दो कोयल रानी .
प्यासी धरती देख माँगती 
हो क्या मेघों से पानी ?

कोयल यह मिठास क्या तुमने 
अपनी माँ से पाई है ? 
माँ ने ही क्या तुमको मीठी 
बोली यह सिखलाई है ?

डाल-डाल पर उड़ना ,गाना 
जिसने तुम्हें सिखाया है .
सबसे मीठे-मीठे बोलो 
यह भी तुम्हें बताया है .

बहूत भली हो, तुमने माँ की 
बात सदा ही है मानी 
इसीलिए तो तुम कहलाती 
हो सब चिड़िया की रानी !


शायरी 
वह दोस्ती ही क्या जिसमें 
दुष्मनी न हो ,
वह दुष्मनी है क्या जिसमें 
दोस्ती न हो !      

Monday, 1 February 2010

बात पते की


अँधेरे  गहरे कुएँ में गिरी लोमड़ी बिन देखे,
उछली -कूदी सब किया लेकिन चली न उसकी एक .
भयभीत हो '' मदद - मदद " वह चीलाई ,
कोई न आया तो अपनी जान गँवाई.
व्याकुल थी बिन पानी बकरी एक बेचारी ,
उसी ओर आ निकली वह भाग्य की मरी .

क्या करती हो बैठे कुएँ में लोमड़ी रानी ,
हैरानी से उसने पूछा, मीठा है क्या पानी ?
चतुर लोमड़ी झटपट बोली - क्या कहती हो 
इतना बढ़िया पानी ज्यों गंगा बहती हो .
निचे आओ, खुद ही इसे आराम से चखना ,
मन में अपने तुम कोई भी भ्रम न रखना .

ख़ुशी-ख़ुशी बकरी ने फिर कूद लागाई,
जैसे निचे गिरी, लोमड़ी पीठ पर आई .
पकड़ सींग उछल मेंड़ के ऊपर चढ़ी ,
धन्यवाद कर बकरी का आगे बढ़ी .
मेरी मदद भी कर दो जरा लोमड़ी बहना 
बहार मुझे निकालो, नहीं यहाँ है रहना .
रोती थी बकरी पर हँसकर लोमड़ी बोली -
देखो पहले फिर कूदो, बात पते की खोली.               

Friday, 29 January 2010

इतना भारी बस्ता है

पढना लिखना खेल नहीं ,
दुःखबंदी है मेल नहीं ,

इतना लम्बा रस्ता है,
ऊपर भारी बस्ता है ,
बस वाला भी धंसता है ,

मैडम आँख दिखाती है,
हमको रोज डराती है 
पर पिंकी पढ़ के आती है 
सर का डर 
सबके सर,
पी टी सर 
आए  घर ,
करी शिकायत 
निकले घर .
 . 

Tuesday, 22 December 2009

साथ रहोगे ,जिन्दा रहोगे



एक बार चार सांड एक जंगल में रहते थे .  वह मिल-जुल के रहते थे . कोई भी जानवर उनसे लड़ नहीं सकता था . उस जंगल में एक शेर रहता था . शेर भी उन्हें नहीं मार पाया . वह उनसे परेशान हो गया . फिर उसने एक प्लैन सोचा . वह एक सांड के पास गया और बोला " तुम्हे पता है की दुसरे सांड तुम्हे गन्दा खाना देते हैं और खुद अच्छा खाना  खाते हैं " . तो सांड उसकी बातों पर यकीन करने लगा. शेर  इस तरह  सब सांडों के पास गया और यही बोला तो सब सांड एक दूसरे पर शक करने लगे और  अलग-अलग रहने लगे . तब शेर ने मौका देख कर  सब सांडों को एक-एक कर के मार दिया.


शिक्षा - हमें मिल-जुल के रहना चाहिए .  
 
आज की स्कूल डायरी- 
आज जब मैं क्लास में पहुंचा तब सब बाते कर रहे थे . एक बच्चा मुझे हर टाइम परेशान करता है . वह कभी बोलता " तुने दे दना दन देखी " कभी बोलता है " तुने ब्लू देखी" और एक अनंत जिसने मुझे बे वजह मारा और कहा " तुने मुझे मारा क्युं ?"और कार्तिक वह लड़ाई कर रहा था रितिक से . रितिक ने उसके हाथ पर मारी . कार्तिक आह-आह करता रहा . फिर उसकी बहन कृतिका वह रोने लग गयी और कहा "तुम्हे मेरा भाई मिलता है मारने के लिए ". तब मैने बिच में टांग अड़ाई और कहा " कार्तिक भी दूसरों को मारता है " तो कृतिका बोली " चुप रै " तब मैं चला गया . और खुछ घंटो बाद छुटी हो गयी .
शिक्षा-दूसरों के बीच में टांग नहीं अड़ानी चाहिए.